आत्महत्या के विचार छोड़ो। Hindi Poem

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मेरे एक मित्र ने किसी महत्वपूर्ण कार्य मे असफल होने पर।। आत्महत्या कर लिया जिसके लिए मेरा दर्द व  ऐसे यूवाओ से एक निवेदन अवश्य पढे।।

नर हो… न नि‍राश करो मन को

agar saphalata manjil hai, to asaphalata vah raasta hai jo hamen is manjil tak pahunchaata hai. yahee vajah hai ki mahaapurushon ne in donon mein hee aasha kee kiran dekhee hai. chhotee-chhotee asaphalataen hee aage chalakar badee saphalata ka aadhaar banatee hain.

aaj ke kuchh naadaan aur kamajor log bhale hee chhotee-motee naakaamayaabee se bhee niraash hokar jeevan se haar maan lete hon, lekin jujhaaroo log apanee kishtee is toophaan mein bhee paar lagaane mein kaamayaab ho jaate hain.

yadi asaphalata ka ek maatr upaay aatmahatya hee hota, to duniya mein sabhee saphal vyakti khatm ho chuke hote, kyonki aaj ke sabhee saphal vyakti apane jeevan mein kabhee na kabhee asaphal jaroor hue hain. yahaan tak ki bhagavaan ne bhee manushy roop mein janm lekar tarah-tarah ke kasht uthae aur kaee asaphalataen bhee jheleen.

duniya mein aise na jaane kitane hee log hain jo kisee ek kshetr mein achchha kaam nahin kar sake aur lagaataar asaphal hote rahe, lekin nirantar prayaas va mehanat ke baad jab unhen kaamayaabee milee, to ve poore sansaar ke saamane ek misaal saabit hue. jeevan mein haarana bhee jarooree hai.

haar se hee jeetane ka raasta milata hai jis par chalakar aap hamesha jeetate rah sakate hain, kyonki ek baar aap haar ka kadava svaad bhee chakh chuke hote hain. asaphalata ke baad saphalata ka mauka hamesha aapake paas hota hai, lekin niraash hokar aatmahanta banane vaale log apane sabhee mauke kho dete hain. kisee bhee kaam mein dobaara se mehanat karake saphalata praapt kee ja sakatee hai, lekin jaan dene ke baad bhool sudhaar ka avasar hee nahin rahata.

aatmahatya saphalata ke saare raaste band kar detee hai. isalie svayan ko ek aur mauka dene ka raasta hamesha aapake paas hona chaahie. kisee bhee sankat mein dhairy hee kaam aata hai. paristhitiyon se ghabaraakar peeth dikhaane vaalon se to bhagavaan bhee kinaara kar leta hai kyonki vah bhee hamaare andar hee hai. saphalata unaka hee saath detee hai, jo har pal aasha kee dor thaame rahate hain.

saamane chaahe kitana hee andhera kyon na ho, par agar aap roshanee kee aas mein chalate rahenge, to us tak pahunch hee jaenge. jeevan mein kisee pareeksha mein phel hone ka yah matalab nahin hai ki poora jeevan hee bekaar ho gaya hai. ek baar asaphal ho jaane ke baad dogune utsaah se phir se pooree taiyaaree ke saath jut jaen aur agalee-pichhalee sabhee kamiyon ko khatm kar den.

aaj jo aap par hans rahe hain ya ungalee utha rahe hain, kal ve bhee aapakee saphalata par prashansa kar rahe honge ya kisee kone mein khade jal-bhoon rahe honge. to utho, jaago aur uddeshy kee praapti kie bina mat ruko.

Why Commit Suicide! (Poem In Hindi)

duniya mein aae ho tum
chinta kyon karate ho maut kee tum
jeena hai tumhe ek baar
marate ho tum kyon baar baar
jeevan mila ek tumhen anamol
khudakushee kyon karate ho tum

roe ho tum hansane kee chaah mein
gire ho tum khade hone kee chaah mein
chale ho tum daudane kee chaah mein
galatee kie ho tum sudhaarane kee chaah mein
kuchh khoe bina pa nahee sakate
haare nahee ho tum jeete ho tum

gam ke bina na hai insaan koee
sangharsh ke bina na paaya manzil koee
khilate hue chehare ko dekho
rote hue chehare ko ponchho
hasate raho hasaate raho
ye jindagee tumhaaree hai jeete raho

Why Commit Suicide! (Poem In Hindi)

मै ममता के अनमोल रतन
इस गहन मौन मे खोए है।
अपने बंधुवर की कायरता का
परिणाम देख फूट फूट कर रोये हैँ।

चलो एक दर्द भरी कहानी सुनाता हूँ।
हे भारत माँ के कर्णधार तुझे मै जगाता हूँ।
हे मूर्ख क्या सोचकर तुने ऐसा अर्नथ कर दिया।

अपना फैसला सुना कर किस्मत को भी बदलने पर मजबूर कर दिया।

हे मित्र मानव जन्म देकर खुदा ने
दिया एक गहरा सदमा है।

तुझको छीन ही लिया परिवार सहित ये
सोचकर जीवन भर भुगतना है।

परेशानियो से हार कर।
ये क्या काम किया मुसिबत भले ही टली।
परन्तु अपने चाहने वालो को क्या अंजाम दिया।
तुमने क्या विचार किया विष
[जहर] हलाहल पीने को
आत्महत्या को बढावा दे दिया।

जीवन ना जीने को।
अभिषेक का ये कटु
प्रश्न भेज दो।

अब असफल हतास युवाओ के सुनहरे जीवन को।
तुम अपने हितैसी के सब कुछ
हो।
ये समझा दो अब चिँतन को।
ना करो ऐसा की उनको।

भी लज्जित होना पड़े देख अपने कठिन जीवन को।

अब क्या कहूँ मै किसी का
सर्मथन ना मिलने से मै तार तार हो जाता हूँ।

देख लोंगो की मानसिकता मै यूं घबराता हूँ।

क्या होगा ऐसे लोगो
का जिनके लिए मै आज गाता हूँ।

फिर भी उनको समझ
नही आता अब मै क्या समझाता हूँ।

जीवन एक खेल है प्रिय इसे खेलते जाता हूँ।

भले ना पड़े शतक मगर मै
कोशिश बार बार कर जाता हूँ।

मै खुद समझता हूँ फिर भी
दुनिया की नजरो मे गिरता जाता हूँ।

सफल होँगे एक दिन
बस ये सोचकर अपना दिल बहलाता हूँ।

जो कहते है मुझको आवारा
निकम्मा उनका एहसान भी मै अपने. ह्रदय मे सजाता
हूँ।

क्या पता किस दिन छू लू उचाइयोँ को ये कह कर
जीता जाता हूँ।

abhishek verma
abhishek verma
रचनाकार अभिषेक वर्मा, सुलतानपुर  [email protected]

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जब किसी व्यक्ति के मन में आत्महत्या के विचार आते हैं

हम सभी लोग अपना जीवन समाप्त करने की शक्ति लेकर पैदा होते हैं। प्रत्येक वर्ष, लाखों लोग आत्महत्या का मार्ग चुनते हैं। यहां तक कि ऐसे समाज में भी लोग आत्महत्या करते हैं जहां आत्महत्या को अवैध या वर्जित घोषित किया गया है। #stopsuicide

जिन लोगों के मन में आत्महत्या के विचार आते हैं, उन्हें कोई और उपाय नहीं सूझता है। उस समय मौत ही उनकी दुनिया के दायरे में घूमती दिखाई देती है और उनके आत्महत्या के विचार इतने प्रबल होते हैं, कि उन्हें कम करके नहीं आंका जाना चाहिए – वे वास्तविक, मज़बूत और तात्कालिक होते हैं। इनका कोई चमत्कारिक उपाय नहीं होता है।

किंतु यह भी सत्य है कि:

  • आत्महत्या अक्सर एक अस्थायी समस्या का स्थायी समाधान होता है।
  • जब हम अवसादग्रस्त होते हैं, तो हम चीजों को वर्तमान क्षण के संकुचित परिप्रेक्ष्य में देखते हैं। एक सप्ताह अथवा एक माह के बाद यही चीजें भिन्न रूप में दिखाई दे सकती हैं।
  • ऐसे अधिकतर लोग जिस समय आत्महत्या करने की सोचते हैं, उसके कुछ समय बाद जीवित रहने की इच्छा रखते हैं। उनका कहना होता है कि वे मरना नहीं चाहते – वे केवल अपनी पीड़ा को मारना चाहते हैं।

सबसे महत्त्वपूर्ण उपाय यह है कि किसी व्यक्ति से बात की जाए। जिन लोगों के मन में आत्महत्या के विचार आते हैं, उन्हें अकेले ही स्थिति का सामना करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्हें अभी सहायता प्राप्त करनी चाहिए।

  • परिवार अथवा मित्रों से बात कीजिए। अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र अथवा किसी सहयोगी से बात भर कर लेने से आपको बहुत राहत मिल सकती है।
  • ‘बीफ्रेंडर‘ से बात कीजिए। कुछ व्यक्ति परिवार के सदस्यों अथवा मित्रों से बात नहीं सकते हैं। कुछ व्यक्तियों के लिए अजनबियों से बात करना अधिक आसान होता है। विश्व भर में ‘बिफ्रेंडिंग सेंटर‘ हैं और इसके स्वयंसेवकों को लोगों की इस प्रकार की समस्याओं को सुनने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। यदि फोन करना कठिन है तो व्यक्ति ई-मेल भेज सकता है।
  • डॉक्टर से बात कीजिए। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से हीन भावना से ग्रस्त है अथवा आत्महत्या करने की सोच रहा है तो वह एक मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। रासायनिक असंतुलन के कारण इस प्रकार की चिकित्सकीय परिस्थिति उत्पन्न होती है और दवाइयों और अथवा चिकित्सा पद्धति के माध्यम से डॉक्टरों द्वारा सामान्यतः इसका उपचार किया जा सकता है। (मुझे और बताइए)

‘चलते रहने‘ में समय एक महत्त्वपूर्ण कारक होता है किंतु उस समय विशेष में क्या होता है, इस पर गौर करना भी महत्त्वपूर्ण होता है। जब किसी के मन में आत्महत्या के विचार आते हैं तो उसे अपनी भावनाओं के बारे में तुरंत बात करनी चाहिए।

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2 COMMENTS

    • comment क लिए धन्यवाद।।

      अभी बहुत स़ी कमियाँ है। blog पर लेकिन जल्द ह ये कमियां दूर की जायेंगी।

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