जानें, क्या है डेरा सच्चा सौदा बाबा राम रहीम और यहां के प्रमुखों की पूरी कहानी

डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम पर फैसला आज, जानें उनकी 7 रोचक बातें

वह गाना गाते हैं। वह सिल्वर स्क्रीन पर भी धमाल मचाते हैं। उन्हें भड़कीले कपड़े पहनने का शौक है। बाइक और कारों को लेकर उनमें जबर्दस्त पैशन है। इन सारी खूबियों को खुद में समेटने वाले शख्सियत का नाम है बाबा राम रहीम, जो डेरा सच्चा सौदा प्रमुख हैं। इन दिनों बाबा राम रहीम कानूनी पचड़े में फंसे हैं। वजह यह है कि बाबा पर उनके आश्रम की साध्वी ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। अब इस मामले में पंचकुला की सीबीआई अदालत शुक्रवार को फैसला सुनाने जा रही है। आइए जानते हैं, अक्सर सुर्खियां बटोरने वाले बाबा राम रहीम से जुड़ी दिलचस्प बातें।

 

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बाबा का दावा है कि उनके पांच करोड़ से अधिक अनुयायी हैं, जो भारत और अन्य मुल्कों में रहते हैं। वे सभी ‘इंसां’ सरनेम का इस्तेमाल करते हैं। अपने गुरु की तरह ये समर्थक ब्लू लॉकेट पहनते हैं, जो अंक एक (1) के आकार में होता है। इसका मतलब है कि एक ईश्वर हैं और उनकी एक ही पहचान है।

Gurmeet Ram Rahim Singh is an Indian guru, music producer, singer-songwriter, actor, and filmmaker. He has been the head of the social group Dera Sacha Sauda since 23 September 1990. Wikipedia
Born: 15 August 1967 (age 50), Sri Gurusar Modia
Albums: Highway Love Charger, Chashma Yaar Ka, Lov Rab Se, MORE
Children: Honeypreet Insan, Charanpreet Kaur Insan, Amarpreet Kaur Insan, Mr. Jasmeet Singh Insan
Parents: Bapu Maghar Singh Ji, Mata Naseeb Kaur Ji
Record labels: T-Series, Universal Music Russia, Universal Music, MORE

अलौकिक शक्तियों के स्वामी!
50 वर्षीय बाबा राम रहीम का जन्म राजस्थान के गुरुसार मोढ़िया नामक गांव में हुआ। दावा है कि बचपन से ही उनके पास अलौकिक शक्तियां हैं, जिस वजह से आसपास के इलाकों में उनकी खूब चर्चा होती थी। मां-बाप घर में उन्हें प्यार से मीता कहकर बुलाते थे। सितंबर 1990 में बाबा राम रहीम डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बने और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

परिवार से मोह
उनके पास अनुयायियों की बड़ी तादाद है और उनकी राजनीति में गहरी पैठ है। यही वजह है कि उत्तर-पश्चिमी भारत में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम बड़ी ताकत हैं। दिलचस्प बात यह है कि डेरा प्रमुख बनने के बाद भी उनका परिवार से मोह नहीं छूटा। बाद में उन्होंने अपने बेटे जसमीत सिंह को अपना वारिस बना दिया। बाबा की दो बेटियां भी हैं।

कारों को लेकर क्रेज
डेरा प्रमुख का बाइक और कारों को लेकर क्रेज जगजाहिर है। उनके पास बेहद महंगी बाइक और कारें हैं। इसमें मर्सेडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी, लेक्सस और टोयोटा शामिल है। इन कारों को वह अपने हिसाब से मॉडिफाई करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन सभी कारों का रंग और रजिस्ट्रेशन नंबर सुरक्षा की लिहाज से लगभग एक जैसा ही है। डेरा प्रमुख को एसयूवी डिकॉई में सफर करना पसंद है, जो बुलेटप्रूफ है और इसमें जैमर भी लगा है। इसके अलावा, बाबा राम रहीम के पास चार्टर प्लेन और इसके लिए एक हवाईपट्टी भी है।

शेफ और महिलावादी
डेरा प्रमुख की वेबसाइट के मुताबिक, बाबा राम रहीम बेहद प्रतिभाशाली भी हैं। वह ‘उम्दा शेफ, टेक्नॉलजी डिवेलपर, महिलावादी और वैश्विक शांति प्रचारक हैं।’ वह बहुत ही अच्छे खिलाड़ी हैं, जो वॉलीबॉल, कबड्डी, क्रिकेट, फुटबॉल, वॉटर पोलो सहित 32 खेल खेलते हैं। उन्हें जोखिम भरे खेल बेहद पसंद है। एक बार तो ‘चॉकलेट’ नामक लाइव कंसर्ट में डेरा प्रमुख ने 30 फीट ऊपर क्रेन में परफॉर्मेंस कर सबको हैरान कर दिया था। बाबा के समर्थकों का दावा है कि वह फटॉग्रफी भी जानते हैं।

एक्टर के साथ म्यूजिक कंपोजर भी
डेरा के समर्थकों का कहना है कि बाबा राम रहीम के छह म्यूजिक ऐल्बमों (थैंक यू फॉर दैट, नेटवर्क तेरा लव का, चश्मा यार का, इंसां, लव रब से और हाइवे लव चार्जर) ने खूब धमाल मचाया है। दावा है कि इनकी एक करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। ‘एमएसजी’ फिल्म में तो बाबा राम रहीम ने अपनी ऐक्टिंग का जौहर भी दिखाया था। इस मूवी में उन्होंने खुद म्यूजिक दिया था और साथ इसे प्रड्यूस भी किया था।

 

खुद डिजाइन करते हैं ड्रेस
बाबा राम रहीम अक्सर कुर्ता-पायजामा में नजर आते हैं और उन्होंने खुद को ‘गुरू ऑफ ब्लिंग’ घोषित कर रखा है। बाबा की वेबसाइट के मुताबिक, वह वही ड्रेस पहनते हैं, जिसका डिजाइन उन्होंने खुद तैयार किया है। अपनी फिल्म के लिए बाबा ने 100 से अधिक कॉस्ट्यूम बनाया था, जिसमें गुरु गोविंद सिंह की पोशाक को लेकर साल 2007 में खूब विवाद भी हुआ था।

राजनीति में भी पैठ
हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह डेरा गए थे। इसके बाद बाबा ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया था। कथित रूप से मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनने पर कई मंत्री और विधायक बाबा का आशीर्वाद लेने डेरा गए थे।


जानें, क्या है डेरा सच्चा सौदा बाबा राम रहीम और यहां के प्रमुखों की पूरी कहानी

जानें, क्या है डेरा सच्चा सौदा और यहां के प्रमुखों की पूरी कहानी
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम.
खास बातें

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बाबा राम रहीम साल 2007 में उस वक्त विवादों में घिर गए थे.
एक विज्ञापन में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के लिबास में दिखे थे.
सिख संगठन डेरा प्रमुख के विचारों के भी खिलाफ है.
बहुचर्चित डेरा सच्चा सौदा, जिसके मौजूदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम हैं. राम रहीम, जिन्हें आजकल हॉलीवुड-बॉलीवुड बाबा भी कहा जाता है, क्योंकि वह फिल्में भी बनाते हैं. लेकिन आज बात बाबा की नहीं, बल्कि उनके डेरा सच्चा सौदा के इतिहास की करते हैं कि कैसे इसकी स्थापना हुई और कौन-कौन इसका हिस्सा बना.

डेरा सच्चा सौदा के आज न जाने कितने अनुयायी हैं. पूरे देश में डेरा सच्चा सौदा के 50 से ज्यादा आश्रम हैं. डेरा प्रमुख का मूल काम समाजसेवा रहा है, जैसे रक्तदान और गरीबों को मदद मुहैया करवाना. डेरे का हरियाणा के सिरसा शहर में अस्पताल भी है, जहां लोगों को सस्ता इलाज मिलता है.

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डेरा सच्चा सौदा की स्थापना
डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 29 अप्रैल, 1948 को उस समय के बलूचिस्तान के मस्ताना जी महाराज ने की थी. प्राप्त जानकारी के अनुसार मस्ताना जी महाराज 1960 तक डेरा प्रमुख रहे. 1960 से 1990 तक शाह सतनाम जी महाराज डेरा प्रमुख रहे, और उन्होंने ही वर्ष 1990 में गुरमीत राम रहीम को डेरा प्रमुख बनाया. बताया जाता है उस वक्त राम रहीम की उम्र महज 23 वर्ष की थी. संत गुरमीत मूल रूप से राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गांव गुरुसर मौठिया के रहने वाले हैं. बीती 15 अगस्त को वह 50 वर्ष के हुए हैं.

सिख समुदाय के साथ गुरमीत राम रहीम का विवाद
शुरुआत से ही डेरा का यह संसार जितना चर्चित है, उतना ही विवादित भी रहा है. गुरमीत राम रहीम साल 2007 में उस वक्त विवादों में घिर गए थे, जब उन्हें एक विज्ञापन में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के लिबास में दिखाया गया था. सिख संगठन तभी से उनके खिलाफ हैं. सिख समुदाय का मानना था कि कोई भी संत किसी की नकल नहीं करता है. लेकिन डेरा प्रमुख ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकारा था और अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह गुरु साहिबान के चरणों की धूलमात्र हैं.

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मॉडर्न बाबा या रॉकस्टार बाबा
डेरा प्रमुख को अगर मॉडर्न बाबा या रॉकस्टार बाबा कहा जाए, तो गलत न होगा, क्योंकि वह न जाने कितने ही नए रूपों में सामने आते हैं. कभी जींस-पैंट तो कभी अलग ही स्टाइल में अपने भक्तों के सामने आते हैं. ऐसा कहा जाता है कि दिन में तीन बार डेरा प्रमुख अपनी ड्रेस बदलते हैं और तीन बार ही अलग-अलग स्टाइल में मंच पर एंट्री भी मारते हैं, लेकिन उनको समर्थकों को उनका हर अवतार पसंद है. हाल ही में डेरा प्रमुख अपनी फिल्म ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को लेकर भी चर्चा में थे.

VIEDO : गुरमीत राम रहीम रेप केस मामले में दोषी करार​
पंचकूला की अदालत ने रेप केस में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया है.

 

गुरमीत राम रहीम सिंह इन्साँ

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
गुरमीत राम रहीम सिंह इन्साँ
जन्म 15 अगस्त 1967 (आयु 50)
Shri Gurusar Modia (Rajasthan, India
आवास सिरसा, हरयाणा, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
व्यवसाय
  • Spiritual leader
  • actor
  • singer
सक्रिय वर्ष 1990–present
संगठन डेरा सच्चा सौदा
बच्चे 4
माता-पिता
  • माघर सिंह
  • नसीब कौर
जालस्थल Official website

गुरमीत राम रहीम सिंह डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख है। गुरमीत राम रहीम सिंह सिद्धू मूल के पंजाबी जाट है। राम रहीम का पहला म्यूजिक ऐल्बम ‘हाइवे लव चार्जर’ नाम से 2014 में आया था। गुरमीत राम रहीम सिंह ने 2015 में फिल्मों में एंट्री की थी। 5 फिल्में कर चुके हैं राम रहीम। सिरसा के डेरा सच्चा सौदा की कमान राम रहीम ने 90 के दशक में संभाली थी।

25 अगस्त 2017 को पंचकूला की विशेष सीबीआई(केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो) अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम रेप(बलात्कार) केस में दोषी करार दिया है, सजा पर फैसला 28 अगस्त 2017 को।गुरमीत राम रहीम सिंह एक अभियुक्त बलात्कारी है|

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम सोमवार को जब सीबीआई की विशेष कोर्ट के जज के सामने पेश हुए तो उन्होंने रहम की गुज़ारिश की.

गुरमीत सिंह ने अपने सामाजिक कार्यों का हवाला दिया, लेकिन जज जगदीप सिंह ने उन्हें 20 साल की सज़ा सुनाई.

गुरमीत सिंह को सज़ा होने के बाद डेरा के कई अनुयायियों के उनसे किनारा करने की बात सामने आई, लेकिन कई अब भी उनके ‘भक्त’ बने हुए हैं.

ऐसे में कई सवाल सामने आते हैं.

जज ने गुरमीत राम रहीम को कहा ‘जंगली जानवर’

सोनू बाबा राम रहीम को अपना भगवान क्यों मानते हैं?

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1- सार्वजनिक तौर पर समाजसेवा करते दिखने वाला कोई संत अकेले में अपराध की तरफ क्यों और कैसे मुड़ जाता है? क्या इसकी वजह दोहरा व्यक्तित्व है?

यूनेस्को में समाज विज्ञान क्षेत्र के पूर्व प्रमुख निदेशक और भारतीय समाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के पूर्व निदेशक डॉ. योगेश अटल इस बर्ताव को भीड़ के मनोविज्ञान से जोड़कर देखते हैं.

वो कहते हैं, “हम भीड़ में होते हैं तो अलग तरीके से सोचते हैं और अकेले में अलग तरीके से.”

डॉ. अटल ये भी कहते हैं कि ऐसे लोग जानते हैं कि वो दूसरों की कमज़ोरियों का फ़ायदा उठा सकते हैं. इसीलिए मुखौटा लगाए रहते हैं.

वो कहते हैं, “ऐसे लोग एक कलाकार की तरह व्यवहार करते हैं. तरह-तरह का अभिनय कर लोगों को मोहित करते हैं. ये अपनी कमज़ोरी छुपाते हैं और दूसरों को बाध्य कर देते हैं कि वो उन्हें भगवान समझें.”

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. एससी मलिक दोहरा व्यक्तित्व होने के तर्क को दमदार नहीं मानते.

डॉ. मलिक का कहना है कि ऐसे लोग काफ़ी चतुर होते हैं और लोगों की दिक्कतों का फ़ायदा उठाते हैं.

वो कहते हैं, “परोपकारी चेहरा तो सिर्फ़ आम लोगों के लिए है. परोपकारी काम सिर्फ़ धन जुटाने और नाम के लिए किया जाता है. अंदर से तो वो उन लोगों को जो बेवकूफ़ बन सकते हैं, उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाते हैं. वो शुरुआत में लोगों से वादे करते हैं और जब लोग साथ रहने लगते हैं तो उन्हें इस्तेमाल करते हैं.”

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2- मुखौटे का फ़ायदा क्या है? क्या इन्हें सच्चाई सामने आने का डर नहीं होता?

डॉ. योगेश अटल की राय में मुखौटा एक दीवार का भी काम करता है. ऐसे लोग एक तरफ़ कई अन्य लोगों का काला धन छुपाते हैं. वहीं समाज के अवांछित तत्वों को भी प्रश्रय देते हैं.

वो कहते हैं कि भारत में अधिकांश लोग भाव-भक्ति और अंधविश्वास में घिरे हुए हैं और जब तक कोई ग़लत बात सामने नहीं आती है तब तक वो एक व्यक्ति का सकारात्मक पक्ष ही देखते हैं.

डॉ. अटल कहते हैं, “अगर गुरमीत सिंह की बात करें तो वो एक मुखौटा हैं जिनके पीछे कई लोग अपना लाभ कमाते रहे हैं. ये दलाली का काम कर रहे थे और उसके ऊपर मुखौटा धर्म का लगा दिया. पकड़े जाने के पहले इतने दिन आनंद कर लिया. उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं था तो डर भी नहीं था.”

वहीं डॉ. मलिक कहते हैं कि ऐसे लोगों का लगता है कि वो अपनी छवि के सहारे बचे रहेंगे, लेकिन गुरमीत सिंह के साथ ऐसा नहीं हो सका.

गुरमीत राम रहीम के रिकॉर्ड: हाथ धोने से ग्रीटिंग कार्ड तक

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3- क्या क़ानून का डर नहीं होता?

डॉ. अटल की राय में हर अपराधी जानता है कि उसे सज़ा मिलेगी, लेकिन वो चाहता है कि लुका-छुपी का खेल चलता रहे.

वो कहते हैं, “जो लोग ऐसा करते हैं वो ख़तरे को भी झेलने को तैयार रहते हैं. वो ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश में रहते हैं कि वो बचे रहें. रेप करने के बाद भी जो व्यक्ति 15 या 17 बरस तक ऐसी मस्ती में रहते हैं और लोगों को आकर्षित भी कर रहे हैं तो कैसे कर रहे हैं.”

वो ये दावा भी करते हैं कि ऐसे लोगों को बदनामी की भी चिंता नहीं होती.

डॉ. अटल गुरमीत सिंह का उदाहरण देते हुए कहते है, “वो जेल गए ,लेकिन कई राज्यों में कामकाज को तीन दिन तक ठप करा दिया. परमशक्ति का प्रदर्शन किया. ऐसे कामों से उन्हें आनंद मिलता है. कल तक उन्हें एक लाख लोग जानते थे तो अब 10 लाख जानते हैं. अब उस पर किस्से बनेंगे. कहानियां बनेंगी. फ़िल्म बनेगी.”

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4- आम लोग ऐसे लोगों के पीछे क्यों जुटते हैं?

डॉ. मलिक की राय है कि मौजूदा वक्त में हर व्यक्ति किसी न किसी तरह की समस्या से घिरा है. वो ऐसे लोगों में सामाधान का रास्ता देखता है.

वो कहते हैं, “लोगों की जरूरतें हैं. हर किसी को निजी समस्या होती हैं. उन्हें आसान समाधान की ज़रूरत होती है. लोग ऐसे समूह में शामिल होना चाहते हैं जहां उनकी पूछ हो.”

हालांकि, वो कहते हैं कि समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को काउंसलिंग का रास्ता अपनाना चाहिए.

वहीं डॉ. योगेश अटल कहते हैं कि ऐसे तत्व सिर्फ़ भारतीय समाज में नहीं बल्कि हर समाज में मौजूद हैं.

वो कहते हैं, “ये हर समाज का सत्य है. हर आदमी या तो अपने वर्तमान से भागना चाहता या फिर उसे और उज्जवल बनाना चाहता है. वो शांति की तलाश में ऐसे लोगों के पास पहुंचता है.”

बीजेपी हो या कांग्रेस सभी गुरमीत राम रहीम को बचाना चाहते थे

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5- जब मुखौटा उतरता है तो क्या लोग सबक लेते हैं?

डॉ. अटल कहते हैं कि समाज की कौन-सी रीत कौन-सा मोड़ लेगी ये समाजशास्त्री भविष्यवक्ता की तरह नहीं बता सकता.

वो कहते हैं कि मौजूदा दौर में कावंड़ियों के पीछे भी गैंग साइकलॉजी काम करती है. कई लोग रास्ते में चोरियां करते हैं.

जब ये क्रम शुरू हुआ था तो ऐसी स्थिति नहीं थी.

तब ये था कि गंगा तक जाना है. रेल और बस नहीं है. समूह में निकलते थे. रास्ते में लोग खाना खिलाते थे. आज सब व्यवसाय हो गया है.

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