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पी. टी. उषा जीवनी | PT Usha Biography In Hindi

पी. टी. उषा जीवनी | PT Usha Biography In Hindi

पूरा नाम – पिलावुलकंडी थेक्केपारंबिल उषा.
जन्म – 27 जून, 1964.
जन्मस्थान – कन्नूर (केरल).
पिता – पैतल.
माता – लक्ष्मी.
विवाह – वी. श्रीनिवासन के साथ.

पी. टी. उषा की जीवनी / PT Usha in Hindi

* 12 साल की उम्र में उन्होंने कन्नूर के ‘स्पोर्ट्स स्कूल’ में प्रवेश लिया वहा उन्हें सर्वाधिक सहयोग अपने प्रशिक्षक श्री. ओ. पी. नब्बियारका मिला.
* 1978 को केरल में हुए अंतरराज्य मुकाबले में उषा ने 3 स्वर्ण प्राप्त किये.
* 1982 के एशियाई खेलो में (Asian Games) में उसने 100 मीटर और २०० मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था. कुवैत में भी इन्ही मुकाबलों में उसने दो स्वर्ण पदक जीते थे. राष्ट्रीय स्तर पर उषा ने कई बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहराया.
* 1984 के लॉस एंजेलस ओलंपिक खेलो में भी चौथा स्थान प्राप्त किया. यह गौरव पाने वाली वे भारत की पहली धाविका है. इसमें वे 1/100 सेकिंड्स से पिछड गयी थी.
* उषा ने 1983 से 1989 के बीच हुई एशियान ट्रैक एंड फिल्ड चैम्पियनशिप में 13 स्वर्णपदक, 3 रजत और एक कांस्य पदक प्राप्त किये.
* जकार्ता की एशियन चैम्पियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक लेकर अपने को बेजोड़ प्रमाणित कर दिया. ‘ट्रैक एंड फिल्ड मुकाबलों’ में लगातार 5 स्वर्ण पदक एवं एक रजत पदक जीतकर वह एशिया की सर्वश्रेष्ठ धाविका बन गई है.
नवें दशक में जो सफलतायें और ख्याति पी. टी. उषा ने प्राप्त की है वे उनसे पूर्व कोई भी भारतीय महिला एथलीट नहीं प्राप्त कर सकी. एशियाड, 82 (Asiad, 82) के बाद से अब तक का समय पी. टी. उषा के चमत्कारी प्रदर्शन से भरा पड़ा है
घुटने में दर्द के कारण उषा ने रीटायर्ड होने का निर्णय लिया, लेकिन उनकी ‘उषा अकादमी’ द्वारा भारतीय एथेलेट्स निर्माण करने का कार्य उन्होंने शुरु रखा प्रशिक्षण और मेहनत के दम पर भारतीय भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलेटीक्स में महत्वपूर्ण प्रदर्शन कर सकते है, ये आत्मविश्वास भारतीय खिलाडियों में निर्माण करने का श्रेय पी. टी. उषा को जाता है.

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उपलब्धियाँ / P. T. Usha :-

1980
* मास्को ओलम्पिक खेलों में भाग लिया
* कराची अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में ४ स्वर्ण पदक.
1981
* पुणे अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में २ स्वर्ण पदक
* हिसार अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में १ स्वर्ण पदक.
* लुधियाना अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में २ स्वर्ण पदक.
1982
* विश्व कनिष्ठ प्रतियोगिता,
* सियोल में १ स्वर्ण व एक रजत जीता।
* नई दिल्ली एशियाई खेलों में २ रजत पदक.
1983
* कुवैत में एशियाई दौड़कूद प्रतियोगिता में १ स्वर्ण व १ रजत.
* नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में २ स्वर्ण पदक प्राप्त किए।
1984
* इंगल्वुड संयुक्त राज्य में अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में २ स्वर्ण पदक.
* लॉस एञ्जेलेस ओलम्पिक में ४००मी बाधा दौड़ में हिस्सा लिया और १/१०० सेकिंड से कांस्य पदक से वंचित हुईं।
* ४x४०० मीटर रिले में सातवाँ स्थान प्राप्त किया।
* सिंगापुर में 8 देशीय अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में ३ स्वर्ण पदक.
* टोक्यो अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में ४००मी बाधा दौड़ में चौथा स्थान प्राप्त किया।
1985
* चेक गणराज्य में ओलोमोग में विश्व रेलवे खेलों में २ स्वर्ण व २ रजत पदक जीते, उन्हें सर्वोत्तम रेलवे खिलाड़ी घोषित किया गया।
* भारतीय रेल के इतिहास में यह पहला अवसर था जब किसी भारतीय स्त्री या पुरुष को यह सम्मान मिला।
* प्राग के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी बाधा दौड़ में ५वाँ स्थान लंदन के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी बाधा दौड़ में कांस्य पदक ब्रित्स्लावा के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी बाधा दौड़ में रजत पदक पेरिस के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी बाधा दौड़ में ४था स्थान बुडापेस्ट के विश्व ग्रां प्री खेल में ४००मी दौड़ में कांस्य पदक लंदन के विश्व ग्रां प्री खेल में रजत पदक ओस्त्रावा के विश्व ग्रां प्री खेल में रजत पदक कैनबरा के विश्व कप खेलों में ४००मी बाधा दौड़ में ५वाँ स्थान व ४००मी में ४था स्थान जकार्ता की एशियाई दौड़-कूद प्रतियोगिता में ५ स्वर्ण व १ कांस्य पदक
1986
* मास्को के गुडविल खेलों में ४००मी में ६ठा स्थान.
* सियोल के एशियाई खेलों में ४ स्वर्ण व १ रजत पदक मलेशियाई मुक्त दौड़ प्रतियोगिता में १ स्वर्ण पदक सिंगापुर के लायंस दौड़ प्रतियोगिता में ३ स्वर्ण पदक नई दिल्ली के चार राष्ट्रीय आमंत्रिण खेलों में २ स्वर्ण पदक
1987
* सिंगापुर की एशियाई दौड़ कूद प्रतियोगिता में ३ स्वर्ण व २ रजत पदक
* कुआला लंपुर की मलेशियाई मुक्त दौड़ प्रतियोगिता में २ स्वर्ण पदक नई दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रिण खेलों में ३ स्वर्ण पदक कलकत्ता दक्षिण एशिया संघ खेलों में ५ स्वर्ण पदक रोम में दौड की विश्व चैंपियनशिप में भाग लिया।
* ४००मी बाधा दौड़ के फ़ाइनल में प्रवेश पाने वाली वे पहली भारतीय बनीं।
1988
* सिंगापुर मुक्त दौड़ प्रतियोगिता में ३ स्वर्ण पदक।
* नई दिल्ली में ओलंपिक पूर्व दौड़ प्रतियोगिता में २ स्वर्म पदक सियोल ओलंपिक में ४००मी बाधा दौड़ में हिस्सा लिया।
1989
* नई दिल्ली की एशियाई दौड़ कूद प्रतियोगिता में ४ स्वर्ण व २ रजत पदक
* कलकत्ता में अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण खेलों में ३ स्वर्ण पदक मलेशियाई मुक्त दौड़ प्रतियोगिता में ४ स्वर्ण पदक
1990
* बीजिंग एशियाई खेलों में ३ रजत पदक
1994
* हिरोशिमा एशियाई खेलों में १ रजत पदक
* पुणे के अंतर्राष्ट्रीय अनुमति खेलों में १ कांस्य पदक
1995
* चेन्नई के दक्षिण एशियाई खेलों में १ कांस्य पदक
* पुणे के अंतर्राष्ट्रीय अनुमति खेलों में १ कांस्य पदक
1996
* ऍटलांटा ओलंपिक खेलों में भाग लिया।
* पुणे के अंतर्राष्ट्रीय अनुमति खेलों में १ रजत पदक
1997
* पटियाला के अंतर्राष्ट्रीय अनुमति खेलों में १ स्वर्ण पदक
1998
* फ़ुकोका की एशियाई दौड़-कूद प्रतियोगिता में १ स्वर्ण,
* १ रजत व २ कांस्य पदक।
* नई दिल्ली में राजा भालेंद्र सिंह दौड़ प्रतियोगिता में २ स्वर्ण व १ रजत पदक बैंकाक एशियाई खेलों में ४x४०० रिले दौड़ में १ रजत पदक
1999
* काठमंडू के दक्षिण एशियाई खेलों में १ स्वर्ण व २ रजत पदक
* नई दिल्ली में राजा भालेंद्र सिंह दौड़ प्रतियोगिता में 1 स्वर्ण पदक

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इनाम व पुरस्कार / P. T. Usha Awards And Honours:-
1 अर्जुन पुरस्कार विजेता, १९८४।
2 पद्मश्री १९८४ में।
3 जकार्ता एशियाई दौड़ प्रतियोगिता की महानतम महिला धाविका, १९८५ में.
4 सर्वश्रेष्ठ धाविका के लिए विश्व ट्रॉफ़ी, १९८५, १९८६.
5 १९८६ सियोल एशियाई खेल में सर्वश्रेष्ठ धाविका होने पर अदिदास स्वर्णिम पादुका ईनाम.
6 एशिया की सर्वश्रेष्ठ धाविका १९८४, १९८५, १९८६, १९८७ व १९८९ में.
7 सर्वश्रेष्ठ रेलवे खिलाड़ी के लिए मार्शल टीटो पुरस्कार, १९८४, १९८५, १९८९, व १९९० में.
8 दौड़ में श्रेष्ठता के लिए ३० अंतर्राष्ट्रीय इनाम.
9 केरल खेल पत्रकार इनाम, १९९९.

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Note :- कुछ महत्त्व पूर्ण जानकारी PT Usha के बारे में Wikipedia ली गयी है.
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