रास बिहारी बोस की जीवनी – Ras Behari Bose Biography in Hindi

रास बिहारी बोस की जीवनी – Ras Behari Bose Biography in Hindi

नमस्कार दोस्तों,

ये Biography जीवनी है स्वतंत्रता-संग्राम-नेता रास बिहारी बोस Ras Behari Bose की जीवन के बारे में जानेंगे जिन्होंने ने कठोर और दमनकारी ‘अंग्रेजी हुकूमत’ से लड़कर देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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रास बिहारी बोस की जीवनी – Ras Behari Bose Biography in Hindi

Rash Behari Bose Biography, History and Facts –

जन्म: 26 मई, 1886

मृत्यु: 21 जनवरी, 1945

कार्य: क्रन्तिकारी नेता

रास बिहारी बोस Rash Behari Bose एक भारतीय क्रान्तिकारी थे जिन्होने अंग्रेजी हुकुमत के विरुद्ध ‘गदर’ एवं ‘आजाद हिन्द फौज’ के संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न सिर्फ देश के अन्दर बल्कि दूसरे देशों में भी रहकर British सरकार के विरुद्ध क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन किया और ताउम्र India को स्वतन्त्रता दिलाने का प्रयास करते रहे। Rash Behari Bose ने दिल्ली में India के तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनायी, गदर की योजना बनाई, Japan जाकर इंडियन इंडिपेंडेस लीग और बाद में आजाद हिंद फौज की स्थापना की।

 Ras Bihari Bose प्रारंभिक जीवन

रास बिहारी बोस Ras Behari Bose का जन्म 26 मई 1886 को बंगाल के बर्धमान जिले के सुबालदह नामक गाँव में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा चन्दननगर Chandannagar में हुई, जहाँ उनके पिता विनोद बिहारी बोस कार्यरत थे।

जब Rash Behari Bose  मात्र तीन साल के थे तब उनकी मां mother का देहांत हो गया, जिसके बाद उनका पालन –पोषण उनकी मामी( Aunt) ने किया। आगे की शिक्षा उन्होंने Chandannagar के duplex college से ग्रहण की। चन्दननगर Chandannagar  उन दिनों फ़्रांसिसी कब्ज़े में था। अपने शिक्षक चारू चांद से उन्हें क्रांति की प्रेरणा मिली। उन्होंने बाद में चिकित्सा और इंजीनियरिंग की पढ़ाई France और Jerman से की।

रास बिहारी बोस Ras Behari Bose बाल्यकाल से ही देश की आजादी के बारे में सोचते थे और क्रान्तिकारी गतिविधियों में गहरी दिलचस्पी लेते थी। रास बिहारी ने देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान में कुछ समय तक हेड क्लर्कHead Clerk  के रूप में कार्य किया था।

रासबिहारी बोस Ras Behari Bose क्रांतिकारी जीवन

 

सन 1905 के बंगाल विभाजन के समय रास बिहारी बोस Ras Behari Bose क्रांतिकारी गतिविधियों से पहली बार जुड़े। इस दौरान उन्होंने अरविंदो घोस और जतिन बनर्जी के साथ मिलकर बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजी हुकुमत की मनसा को उजाकर करने का प्रयत्न किया।

धीरे-धीरे उनका परिचय बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारियों जैसे जतिन मुखर्जी की अगुआई वाले ‘युगान्तर’ क्रान्तिकारी संगठन के अमरेन्द्र चटर्जी और अरबिंदो घोष के राजनीतिक शिष्य रहे जतीन्द्रनाथ बनर्जी उर्फ निरालम्ब स्वामी से हुआ। निरालम्ब स्वामी के सम्पर्क में आने पर उनका परिचय संयुक्त प्रान्त (वर्तमान U.P. उत्तर प्रदेश) और Punjab के प्रमुख आर्य समाजी क्रान्तिकारियों से हुआ।

दिसंबर 1911 में ‘दिल्ली दरबार’ के बाद जब India के वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की सवारी दिल्ली के चांदनी चौक में निकाली जा रही थी तब हार्डिंग पर बम फेंका गया परन्तु वो बाल-बाल बच गए। युगांतर दल के सदस्य बसन्त कुमार विश्वास ने हार्डिंग की बग्गी पर बम फेंका था लेकिन निशाना चूक गया। बम फेंकने की इस योजना में रास बिहारी की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

बसंत तो पकड़े गए पर बोस ब्रिटिश पुलिस से बचने के लिये रातों-रात रेलगाड़ी से देहरादून चले गए और अगले दिन कार्यालय में इस तरह काम करने लगे मानो कुछ हुआ ही नहीं हो। अंग्रेजी प्राशासन को उनपर कोई शक न हो इसलिए उन्होंने देहरादून के नागरिकों की एक सभा बुलायी और वायसराय हार्डिंग पर हुए हमले की निन्दा भी की।

सन 1913 में बंगाल बाढ़ राहत कार्य के दौरान उनकी मुलाकात जतिन मुखर्जी से हुई, जिन्होंने उनमें नया जोश भर दिया जिसके बाद रास बिहारी बोस दोगुने उत्साह के साथ फिर से क्रान्तिकारी गतिविधियों के संचालन में जुट गये।

उन्होंने India को आजादी दिलाने के लिये प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर की योजना बनायी और फरवरी 1915 में अनेक भरोसेमंद क्रान्तिकारियों की सेना में घुसपैठ कराने की कोशिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके क्रांतिकारी कार्यों का एक प्रमुख केंद्र वाराणसी रहा, जहाँ से उन्होंने गुप्त रूप से क्रांतिकारी आंदोलनों का संचालन किया।

 Ras Bihari Bose जापान Japan  निर्वासन

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान युगांतर के कई नेताओं ने ‘सशस्त्र क्रांति’ की योजना बनाई, जिसमें Ras Bihari Bose की प्रमुख भूमिका थी। इन क्रांतिकारियों ने सोचा था कि प्रथम विश्वयुद्ध First world war के कारण अधिकतर सैनिक देश से बाहर गये हुये थे,  शेष बचे सैनिकों को आसानी से हराया जा सकता था, लेकिन दुर्भाग्य से उनका यह प्रयास भी असफल रहा ।

ऐसा माना जाता है कि सन 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का यह पहला व्यापक और विशाल क्रांतिकारी प्रयत्न था। इसके बाद ब्रिटिश पुलिस Ras Behari Bose रास बिहारी बोस के पीछे लग गयी जिसके कारण वो भागकर जून 1915 में राजा पी. एन. टैगोर के छद्म नाम से Japan पहुँचे और वहाँ रहकर India की आजादी के लिये काम करने लगे।

Japan  में उन्होंने अपने जापानी क्रान्तिकारी मित्रों के साथ मिलकर देश की स्वतन्त्रता के लिये निरन्तर प्रयास किया। Japan में उन्होंने अंग्रेजी अध्यापन, लेखन और पत्रकारिता का कार्य किया। वहाँ पर उन्होंने ‘न्यू एशिया’ नाम से एक समाचार-पत्र भी निकाला। उन्होंने Japan भाषा भी सीख ली और इस भाषा में कुल 16 पुस्तकें लिखीं। उन्होंने हिन्दू धर्मग्रन्थ ‘रामायण’ का भी अनुवाद Japan भाषा में किया।

सन 1916 में  Ras Bihari Bose रास बिहारी बोस ने प्रसिद्ध पैन एशियाई समर्थक सोमा आइजो और सोमा कोत्सुको की पुत्री से विवाह कर लिया और सन 1923 में Japan नागरिकता ग्रहण कर ली। Ras Behari Bose रास बिहारी बोस ने Japan अधिकारियों को भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन और राष्ट्रवादियों के पक्ष में खड़ा करने और India की आजादी की लड़ाई में उनका सक्रिय समर्थन दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मार्च 1942 में टोक्यो में ‘इंडियन इंडीपेंडेंस लीग Indian Independence League ’ की स्थापना की.

जून 1942 में उन्होंने बैंकाक में Indian Independence League का दूसरा सम्मेलन बुलाया, जिसमें सुभाष चंद्र बोस को लीग में शामिल होने और उसका अध्यक्ष बनने के लिए आमन्त्रित किया गया। मलय और बर्मा के मोर्चे पर Japan ने कई भारतीय स्वतंत्रता सेनानी युद्धबन्दियों को पकड़ा था। इन युद्धबन्दियों को Indian Independence League में शामिल होने और इंडियन नेशनल आर्मी (आई०एन०ए०) का सैनिक बनने के लिये प्रोत्साहित किया गया। Indian Independence League की सैन्य शाखा के रूप में सितम्बर 1942 में गठित की गयी। इसके बाद Japan सैन्य कमान ने रास बिहारी बोस Ras Behari Bose और जनरल मोहन सिंह को Indian Independence League के नेतृत्व से हटा दिया लेकिन INA का संगठनात्मक ढाँचा बना रहा। बाद में स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज के नाम से Indian Independence League का पुनर्गठन किया।

 Ras Bihari Bose निधन

India को अंग्रेजी हुकुमत से मुक्ति दिलाने का सपना लिए,  यह वीर सपूत Great Indian Freedom Fighter रास बिहारी बोस Ras Behari Bose  21 जनवरी, 1945 को परलोक सिधार गया। Japan सरकार ने उन्हें ‘आर्डर आफ द राइजिंग सन Order of the Rising Sun ’ के सम्मान से अलंकृत किया ।

 

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