अरुणा आसफ़ अली की जीवनी | Aruna Asaf Ali Biography In Hindi

अरुणा आसफ़ अली की जीवनी | Aruna Asaf Ali Biography In Hindi

 

अरुणा आसफ़ अली की जीवनी | Aruna Asaf Ali Biography In Hindi
अरुणा आसफ़ अली की जीवनी | Aruna Asaf Ali Biography In Hindi

पूरा नाम – अरुणा आसफ़ अली
जन्म  –   16 जुलाई 1909
जन्मस्थान – कालका ग्राम, पंजाब
पिता  –   उपेन्द्रनाथ गांगुली
माता  –  अम्बालिका देवी
विवाह –  आसफ़ अली

स्वतंत्रता सेनानी अरुणा आसफ़ अली की जीवनी / Aruna Asaf Ali Biography In Hindi

अरुणा आसफ़ अली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थीं. उन्हें 1942 मे भारत छोडो आंदोलन के दौरान, मुंबई के गोवालीया मैदान मे कांग्रेस का झंडा फहराने के लिये हमेशा याद किया जाता है. स्वतंत्रता के बाद भी वह राजनीती में हिस्सा लेती रही और 1958 में दिल्ली की मेयर बनी. 1960 में उन्होंने सफलतापूर्वक मीडिया पब्लिशिंग हाउस की स्थापना की. उनके या योगदान को देखते हुए 1997 में उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

अरुणा आसफ़ अली की जीवनी | Aruna Asaf Ali Biography In Hindi
अरुणा आसफ़ अली की जीवनी | Aruna Asaf Ali Biography In Hindi

अरुणा आसफ अली का जन्म अरुणा गांगुली के नाम से 16 जुलाई 1909 को ब्रिटिश कालीन भारत में बंगाली ब्राह्मण परीवार में पंजाब के कालका ग्राम में हुआ था. उनके पिता उपेन्द्रनाथ गांगुली एक रेस्टोरेंट के मालिक थे. उनकी माता अम्बालिका देवी त्रिलोकनाथ सान्याल की बेटी थी.

उपेन्द्रनाथ गांगुली का छोटा भाई धीरेंद्रनाथ गांगुली भूतकालीन फ़िल्म डायरेक्टर थे. उनका एक और भाई नागेंद्रनाथ एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर थे जिन्होंने नोबेल प्राइज विनर रबीन्द्रनाथ टैगोर की बेटी मीरा देवी से विवाह किया था. अरुणा की बहन पूर्णिमा बनर्जी भारत के कांस्टिटुएंट असेंबली की सदस्य है. अरुणा की पढाई लाहौर के सेक्रेड हार्ट कान्वेंट में पूरी हुई. ग्रेजुएशन के बाद कलकत्ता के गोखले मेमोरियल स्कूल में वह पढाने लगी. वहा उनकी मुलाकात आसफ अली से हुई, जो अल्लाहाबाद में कांग्रेस पार्टी की नेता थे. 1928 में अपने परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने सितम्बर 1928 में विवाह कर लिया.

अरुणा आसफ अली स्वतंत्रता सेनानी – Aruna Asaf Ali Women Freedom Fighters Of India In Hindi:-

आसफ अली से विवाह करने और महात्मा गाँधी के नमक सत्याग्रह में शामिल होने के बाद वह कांग्रेस पार्टी की एक सक्रीय सदस्य बनी. हिंसात्मक होने की वजह से उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और इसीलिये 1931 के गांधी-इरविन करार के बावजूद उन्हें छोड़ा नही गया.

लेकिन कैद बाकी महिलाओ ने उनका साथ देते हुए, कहा की वे तभी जेल छोड़ेंगे जब अरुणा आसफ अली को भी रिहा किया जायेगा. लोगो के भारी सहयोग को देखते हुए आख़िरकार अधिकारियो को अरुणा आसफ अली को रिहा करना ही पड़ा.

1932 में उन्होंने तिहार जेल में अपनी विविध मांगो को लेकर भूख हड़ताल भी की थी. उस समय तिहार जेल की स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण उनकी भूक हड़ताल से तिहार जेल में काफी सुधार हुए. बाद में वह अम्बाला चली गयी

महात्मा गाँधी के आह्वान पर हुए 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अरुणा आसफ अली ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था. इतना ही नहीं जब सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार कर लिए गए तो उन्होंने अद्भुत कौशल का परिचय दिया और नौ अगस्त के दिन मुम्बई के गवालिया टैंक मैदान में तिरंगा झंडा फहराकर अंग्रेजों को देश छोड़ने की खुली चुनौती दे डाली.

आज अरुणा आसफ अली भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर उनके कार्य और उनका अंदाज आने वाली पीढ़ियों को सदैव रास्ता दिखाते रहेंगें. उन्हें यूँ ही स्वतंत्रता संग्राम की ‘ग्रैंड ओल्ड लेडी’ नहीं कहा जाता है.

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