अज़ीम प्रेमजी की जीवनी | Azim Premji Biography In Hindi

अज़ीम प्रेमजी का प्रेरणादायक जीवन परिचय / Azim Premji Biography In Hindi

 

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अज़ीम प्रेमजी की जीवनी | Azim Premji Biography In Hindi

अज़ीम हाशमी प्रेमजी एक भारतीय उद्योजक, निवेशक और मानवप्रेमी है. प्रेमजी विप्रो लिमिटेड के चेयरमैन है जो साधारणतः भारतीय आईटी उद्योग में Czer के नाम से जानी जाती है. मंदी के दिनों में उन्होंने विप्रो को संभाला और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में विर्प्रो को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलवाई. 2010 में, एशियावीक ने उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली 20 लोगो में से एक बताया. वह दो बार टाइम्स पत्रिका की दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगो की सूचि में भी शामिल हो चुके है, वे अपनी निजी संपत्ति 2 बिलियन डॉलर के पोर्टफोलियो का प्रबंधन भी करते है.

1945 में मुहम्मद हाशिम प्रेमजी ने वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट लिमिटेड की स्थापना की जो महाराष्ट्र के जलगाव जिले के छोटे से शहर अमलनेर में स्थापित की. वहा वे खाने के तेल का उत्पादन किया जो बाद में सनफ्लावर वनस्पति तेल के नाम से प्रसिद्ध हुआ और बाद में उन्होंने लांड्री साबुन 787 का भी उत्पादन करना शुरू किया. 1966 में, अपने पिता के मृत्यु की खबर मिलते ही, 21 साल के अज़ीम स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से घर वापिस आ गये, वहा वे इंजीनियरिंग की पढाई कर रहे थे. आते ही उन्होंने विप्रो कंपनी की कमान संभाली. विप्रो को पहले वेस्टर्न वेजिटेबल उत्पाद बनाने वाली कंपनी कहा जाता था लेकिन अजीम प्रेमजी ने बाद में इसे बदलकर बेकरी, टॉयलेट संबंधी उत्पाद, बालो संबंधी उत्पाद, बच्चो संबंधी उत्पाद बनाने वाली कंपनी में बदल डाला. 1980 में, इस युवा उद्योगपति ने भारत में आईटी क्षेत्र की जरूरतों को समझा और IBM के भारत से चले जाने के बाद उन्होंने भारत में आईटी क्षेत्र का विकास करने की ठानी. और IBM का नाम बदलकर विप्रो रख दिया. बाद में प्रेमजी ने एक अमेरिकी कंपनी की सहायता से अपनी साबुन बनाने वाली कंपनी को सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी में परिवर्तित कर दिया.

अज़ीम प्रेमजी का निजी जीवन – Azim Premji Personal Life :-

अजीम का जन्म निजारी इस्माइली शिया मुस्लिम परिवार में भारत के बॉम्बे शहर में हुआ था. उनके पिता एक मशहूर उद्योगपति थे और बर्मा के राइस किंग के नाम से जाने जाते थे. विभाजन के बाद जब जिन्नाह ने उनके पिता मुहम्मद हाशिम प्रेमजी को पकिस्तान आने के लिये आमंत्रित किया तो वे पीछे मुड़े और उन्होंने भारत में ही रहने का निर्णय लिया.

प्रेमजी ने USA की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है. उनका विवाह यास्मीन से हुआ. उन्हें दो बच्चे है, रिषद और तारिक. रिषद फिलहाल विप्रो के आईटी व्यापार के चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर है.

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अज़ीम प्रेमजी अवार्ड -Azim Premji Awards :-

बिज़नस वीक ने प्रेमजी को महानतम उद्यमियों में से एक माना और स्वीकार किया की विप्रो दुनिया की सबसे तेज़ आगे बढ़ने वाली कंपनियों में से एक है.
2000 में उन्हें उच्च शिक्षा के मनिपाल अकादमी द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया. 2006 में, राष्ट्रिय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान, मुंबई ने उन्हें “लक्ष्य व्यापार दूरदृष्टि” का शीर्षक देकर सम्मानित किया.
2009 में, उन्हें मिडलटाउन विश्वविद्यालय ने उन्हें कनेक्टीकट के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया.
2015 में, उन्हें मैसूर विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया.
2005 में, भारत सरकार ने उन्हें ट्रेड & कॉमर्स के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये पद्म भुषण अवार्ड देकर सम्मानित किया.
2011 में उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत का दूसरा सर्वोच्च अवार्ड पद्म विभूषण दिया गया.
2013 में उन्हें ET लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया.

अज़ीम प्रेमजी जीवन घटनाक्रम – Azim Premji Short Biography :-

1945: 24 जुलाई को अजीम रेमजी का जन्म मुंबई में हुआ
1966: अपने पिता की मृत्यु के बाद अमेरिका से पढ़ाई छोड़ भारत वापस आ गए
1977: कंपनी का नाम बदलकर ‘विप्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ कर दिया गया
1980: विप्रो का आई.टी. क्षेत्र में प्रवेश 1982: कंपनी का नाम ‘विप्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ से बदलकर ‘विप्रो लिमिटेड’ कर दिया गया
1999-2005: सबसे अमीर भारतीय रहे
2001: उन्होंने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ कीस्थापना की
2004: टाइम मैगज़ीन द्वारा दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल किया
2010: एशियावीक के विश्व के 20 सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों की सूचि में नाम
2011: टाइम मैगज़ीन द्वारा दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल किया
2013: प्रेमजी ने अपने धन का 25 प्रतिशत भाग दान कर दिया और अतिरिक्त 25 प्रतिशत अगले पांच सालों में दान करने की भी घोषणा की.

परोपकार

  1. अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और विश्वविद्यालय

2001 में उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना की, काफी एक बस, न्यायसंगत मानवीय और टिकाऊ समाज की सुविधा है कि गुणवत्ता सार्वभौमिक शिक्षा प्राप्त करने में योगदान करने के लिए एक दृष्टिकोण के साथ एक गैर लाभकारी संगठन,. फाउंडेशन भारत के 13 लाख सरकारी स्कूलों में प्रणालीगत परिवर्तन के लिए एक संभावित है कि ‘अवधारणा के सबूत’ पायलट और विकसित करने के लिए प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में काम करता है। विशेष ध्यान देने के लिए इन स्कूलों के बहुमत मौजूद है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने पर है। ग्रामीण सरकार चलाने में प्राथमिक शिक्षा (कक्षा मैं आठवीं तक) के साथ काम करने के लिए इस विकल्प भारत में शिक्षा प्राप्ति के सबूत के लिए एक प्रतिक्रिया है। 2001 में प्रेमजी द्वारा स्थापित गैर लाभकारी संगठन वर्तमान में विभिन्न राज्य सरकारों के साथ घनिष्ठ साझेदारी में, कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पांडिचेरी, आंध्र प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश भर में कार्य करता है। फाउंडेशन स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में और इक्विटी के सुधार में योगदान करने में मदद करने के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर काम किया है। दिसंबर 2010 में, वह भारत में स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए 2 अरब डॉलर दान करने का वचन दिया. इस अजीम प्रेमजी ट्रस्ट को, उसके द्वारा नियंत्रित कुछ संस्थाओं द्वारा आयोजित विप्रो लिमिटेड के 213 मिलियन इक्विटी शेयरों, स्थानांतरित द्वारा किया गया है। इस दान भारत में अपनी तरह का सबसे बड़ा है। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के अधिनियम के तहत स्थापित किया गया थाकर्नाटक विधान सभा, शिक्षा और विकास पेशेवरों को विकसित करने के कार्यक्रमों को चलाने के लिए शैक्षिक परिवर्तन के लिए वैकल्पिक मॉडल की पेशकश और भी लगातार शैक्षिक सोच की सीमाओं को फैलाने के लिए शैक्षिक अनुसंधान में निवेश करते हैं।

  1. शपथ देते

अजीम प्रेमजी के लिए साइन अप करने वाले पहले भारतीय बन गया देते हुए शपथ, के नेतृत्व में एक अभियान वॉरेन बफेट और बिल गेट्स परोपकारी कारणों के लिए अपने धन का सबसे अधिक देने के लिए एक प्रतिबद्धता बनाने के लिए धनी लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए,. उन्होंने बाद तीसरे गैर अमेरिकी है रिचर्ड ब्रैनसन और डेविड Sainsbury इस परोपकार क्लब में शामिल होने के लिए. अजीम प्रेमजी — “मैं दृढ़ता से धन है विशेषाधिकार प्राप्त कर रहे हैं जो हम लोग, कोशिश करते हैं और अब तक कम विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जो लाखों लोगों के लिए एक बेहतर दुनिया बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान मानते हैं कि” अप्रैल 2013 में वह पहले से ही दान करने के लिए अपने निजी धन से अधिक से अधिक 25 प्रतिशत दिया गया है।

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