चिड़िया का पंख Chidiya Ka Pankh moral story Motivational Story

चिड़िया का पंख Chidiya Ka Pankh moral story

चिड़िया का पंख Chidiya Ka Pankh moral story Motivational Story एक गरीब आदमी शिकार करने जंगल तो जाता लेकिन अच्छा शिकार न मिलने के कारण प्रायः छोटी चिड़ियाँ ही उसके हाथ लगती थीं। इस वजह से वह और उसकी पत्नी अधिकांशतः भूखे ही रहते। एक दिन उस आदमी को कोई छोटी चिड़िया भी नही मिल पाई। वह थककर एक पेड़ के नीचे बैठ गया। तभी उसे किसी चिड़िया की मीठी आवाज़ सुनाई दी। उसने सिर उठाकर देखा तो एक छोटी सी चिड़िया डाल पर बैठी थी।  



उसके पंख लाल थे। वह चिड़िया बोली-“तुम गरीब हो। मैं तुम्हारी मदद करना चाहती हूँ। मैं तुम्हें अपना एक पंख दूँगी। तुम घर जाकर उसे पका लेना, तुम्हें बढ़िया खाना मिल जाएगा।”उस आदमी ने चिड़िया को धन्यवाद दिया और चिड़िया का पंख लेकर घर आ गया। घर पहुँचकर उसने अपनी पत्नी को सारी बात बता दी। यह सुनकर पत्नी उसका मजाक उड़ाते हुए बोली-“मूर्ख आदमी, उस चिड़िया को पकड़कर लाते तो हमे कुछ तो खाना मिल जाता?”

 

पति ने पत्नी की बात का कोई जवाब नही दिया और पंख पकाने लगा। थोड़ी ही देर में बर्तन खाने से भर गया। अब वह चिड़िया से रोज चिड़िया से एक पंख मांग लाता। लेकिन पत्नी को इससे संतोष नही था। वह चाहती थी की वह चिड़िया ही उसके पास हो और वह अपनी मर्जी से दो, तीन या चार पंख पकाकर ज्यादा खाना खा सके। जबकि पति कहता वह चिड़िया तो मेरी दोस्त है। 

 

एक दिन जब वह आदमी जंगल जा रहा था, तो उसकी पत्नी छुपकर उसका पीछा करने लगी। चिड़िया को देखते ही उसने उस पर पत्थर मारा। पत्थर लगते ही चिड़िया पेड़ से गिर पड़ी और मर गई। चिड़िया को मारा देखकर वह आदमी बड़ा दुखी हुआ जबकि उसकी पत्नी खुश थी। वह बोली-“अब हमें ज्यादा खाना मिलेगा।” वे मरी चिड़िया को लेकर घर आए। 

 

औरत ने चिड़िया का एक पंख नोच लिया। वह उसे बर्तन में पकाने लगी। पकाती रही, पकाती रही लेकिन वह पंख अंत तक पंख ही रहा। वह खाने में नही बदला। अब उनके पास न पंख रहा न चिड़िया, उस दिन के बाद वे दोनों फिर से भूखों मरने लगे।

 

Story Moral शिक्षा:- हमें ज्यादा लालच के चक्कर में नही पड़ना चाहिए। जितना हमारे पास हैं उसी से हमें संतोष करना चाहिए।  

 

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