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रामस्वामी वेंकटरमण – विकिपीडिया| Ramaswamy Venkataraman Biography In Hindi

रामास्वामी वेंकटरमण | Ramaswamy Venkataraman Biography In Hindi

पूरा नामरामस्वामी वेंकटरमण
अन्य नामआर. वेंकटरमण
जन्म4 दिसम्बर, 1910
जन्म भूमिमद्रास
मृत्यु27 जनवरी, 2009
मृत्यु स्थाननई दिल्ली
अभिभावकरामास्वामी अय्यर (पिता)
पति/पत्नीजानकी देवी
संतानतीन बेटियाँ (पद्मा, लक्ष्मी एवं विजया)
नागरिकताभारतीय
पार्टीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
पदउपराष्ट्रपति और भारत के आठवें राष्ट्रपति
कार्य काल25 जुलाई, 1987 से 25 जुलाई 1992 तक
शिक्षाएल.एल.बी, स्नातकोत्तर (अर्थशास्त्र)
विद्यालयमद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास
पुरस्कार-उपाधिसोवियत लैंड पुरस्कार और कई अकादमी पुरस्कार
विशेष योगदानवेंकटरमण तमिलनाडु की औद्यागिक क्रान्ति के शिल्पकार माने जाते हैं। इन्होंने ही तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज को प्रेरित किया था कि उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया जाए, ताकि तमिलनाडु भारत की औद्योगिक हस्ती बन सके।
अन्य जानकारीइन्होंने एक पुस्तक ‘माई प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ शीर्षक से लिखी। इस पुस्तक में इन्होंने अपने राष्ट्रपतित्व काल के पाँच वर्ष की घटनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है।

 

Ramaswamy Venkataraman – रामास्वामी वेंकटरमण एक भारतीय वकील, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे उन्होंने भारत की यूनियन मिनिस्टर और भारत के आठवे राष्ट्रपति बने रहते हुए सेवा की थी।

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रामास्वामी वेंकटरमण | Ramaswamy Venkataraman Biography In Hindi

रामास्वामी वेंकटरमण की जीवनी – Ramaswamy Venkataraman Biography In Hindi

Ramaswamy Venkataraman प्रारंभिक जीवन –

Ramaswamy Venkataraman का जन्म तमिलनाडु के तंजौर जिले में पत्तुकोत्तई ग्राम के पास राजमदम में हुआ था। उन्होंने पत्तुकोत्तई की सरकारी बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल से प्राथमिक और ग्रेजुएशन के पहले की पढाई उन्होंने तिरुचिरापल्ली के नेशनल कॉलेज से प्राप्त की थी।

स्थानिक जगहों पर ही उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और मद्रास शहर में Ramaswamy Venkataraman ने मद्रास के लोयोला कॉलेज से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद मद्रास के लॉ कॉलेज से वे लॉ के लिए क्वालीफाई किया। 1935 में वेंकटरमण ने खुद को मद्रास हाई कोर्ट और 1951 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया।

लॉ का अभ्यास करते समय Ramaswamy Venkataraman ने भारतीय स्वतंत्रता अभियान में भाग लेने के लिए खुद को ब्रिटेन कोलोनियल सुब्जूगेशन से खुद को निकाला। इसके बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में शामिल होकर ब्रिटिश सरकार का विरोध किया और 1942 के भारत छोड़ अभियान में भी वे शामिल हुए। इस समय वेंकटरमण की लॉ पढने की इच्छा बढ़ते लगी थी। 1946 में जब ब्रिटिश ताकतों का भारत में स्थानांतरण हो रहा था, तब भारत सरकार ने उन्हें मलाया और सिंगापूर भेजे जाने वाले वकीलों में शामिल किया था। 1947 से 1950 में वेंकटरमण ने मद्रास प्रोविंशियल बार फेडरेशन के सेक्रेटरी बने रहे हुए सेवा की थी।

Ramaswamy Venkataraman राजनीतिक करियर –

लॉ और ट्रेड कार्यो ने समाज में Ramaswamy Venkataraman की पहचान और बढाई। वे उस घटक असेंबली के भी सदस्य थे जिन्होंने भारतीय संविधान की रचना की थी। 1950 में वे मुक्त भारत प्रोविजनल संसद (1950-1952) और पहली संसद (1952-1957) में चुने गये थे। उनके वैधानिक कार्यकाल के समय, वेंकटरमण 1952 के अंतर्राष्ट्रीय मजदूरो की मेटल ट्रेड कमिटी में मजदूरो के दूत बनकर उपस्थित थे। न्यूज़ीलैण्ड में आयोजित कामनवेल्थ पार्लिमेंटरी कांफ्रेंस में वे भारतीय संसद दूतो के सदस्य भी थे। इसके साथ ही 1953 से 1954 के बीच वे कांग्रेस संसद पार्टी के सेक्रेटरी भी थे।

1957 में पुनः उनकी नियुक्ती संसद भवन में की गयी, वेंकटरमण ने इसके बाद मद्रास राज्य सरकार में मिनिस्टर के पद पर रहने के लिए लोक सभा की सीट से इस्तीफा दे दिया था। वहाँ रहते हुए वेंकटरमण ने उद्योग, मजदुर, सहयोग, पॉवर, यातायात और कमर्शियल टैक्स जैसे विभागों को 1957 से 1967 तक संभाला था। इस समय में वे उप्पर हाउस, विशेषतः मद्रास वैधानिक कौंसिल के भी लीडर थे।

Ramaswamy Venkataraman सम्मान और उपलब्धियाँ –

Ramaswamy Venkataraman को मद्रास यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट ऑफ़ लॉ की उपाधि से सम्मानित किया है और साथ ही नागार्जुन यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें डॉक्टरेट ऑफ़ लॉ की उपाधि से सम्मानित किया था। मद्रास मेडिकल कॉलेज के वे भूतपूर्व सम्माननीय सदस्य है और यूनिवर्सिटी ऑफ़ रूरकी में वे सामाजिक विज्ञान के डॉक्टर भी थे, इसके बाद बुर्द्वान यूनिवर्सिटी में उन्हें डॉक्टर ऑफ़ लॉ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने की वजह से उन्हें ताम्र पत्र से भी सम्मानित किया गया था। UN एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में प्रेसिडेंट के रूप में काम करने की वजह से यूनाइटेड नेशन के सेक्रेटरी जनरल ने उन्हें यादगार पुरस्कारों से सम्मानित भी किया था। कांचीपुरम के शंकराचार्य ने उन्हें “सत सेवा रत्न” के नाम का शीर्षक भी दिया था। वे कांची के परमाचार्य के भक्त थे।

Ramaswamy Venkataraman बीमारी और मृत्यु –

12 जनवरी 2009 को Ramaswamy Venkataraman  को आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में उरोसेप्सिस की वजह से भर्ती किया गया था। 20 जनवरी को उनकी अवस्था और भी ज्यादा गंभीर होने लगी थी, इसकी वजन उनके शरीर में ब्लड प्रेशर की कमी होना था।

और अंततः 27 जनवरी 2009 को दोपहर 2:30 बजे नयी दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में ऑर्गन फेलियर की वजह से 98 साल की आयु में उनका देहांत हो गया। गणतंत्र दिवस के दुसरे दिन उनकी मृत्यु हुई थी और इसी वजह से भारत के राष्ट्रपति ने उनके सम्मान में कुछ कार्यक्रमों को रद्द भी कर दिया था। अंत में पुरे सम्मान के साथ राज घाट के पास एकता स्थल में पुरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

 

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