सतीश गुजराल की जीवनी – Satish Gujral Biography in Hindi

 

 

सतीश गुजराल की जीवनी – Satish Gujral Biography in Hindi

जन्म: 25 दिसम्बर, 1925, झेलम (अब pakistan)

प्रसिद्धि: चित्रकार, मूर्तिकार, ग्राफ़िक डिज़ायनर, लेखक और वास्तुकार

शिक्षण संस्थान: मेयो स्कूल आफ आर्ट (लाहौर), जे. जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट बाम्बे, पलासियो नेशनेल डि बेलास आर्ट, मेक्सिको एवं इंपीरियल सर्विस कालेज विंडसर, यू.के.

पुरस्कार: पद्म विभूषण, तीन बार कला का राष्ट्रीय पुरस्कार (दो बार चित्रकला और एक बार मूर्तिकला के लिये)

Satish Gujral  बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार, मूर्तिकार, लेखक और वास्तुकार हैं। वे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई हैं। भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सन 1999 में Satish Gujral पद्म विभूषण से सम्मानित किया।  जब Satish मात्र आठ साल के थे तब पैर फिसलने के कारण इनकी टांगे टूट गईं और सिर में भी काफी चोट आई जिसके कारण इन्हें कम सुनाई पड़ने लगा और लोग उन्हें लंगड़ा, बहरा और गूंगा समझने लगे। हाल में ही सतीश ने अपनी आत्मकथा लिख कर लेखक के रूप में अपनी नयी पहचान बनायी है।

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Satish Gujral

प्रारंभिक जीवन

सतीश का जन्म 25 दिसम्बर, 1925 को ब्रिटिश इंडिया के झेलम (अब पाकिस्तान) में हुआ था। आठ साल की उम्र में चोट लगने के कारण इन्हें कम सुनाई पड़ने लगा। उन्होंने लाहौर स्थित मेयो स्कूल आफ आर्ट में पाँच वर्षों तक अन्य विषयों के साथ-साथ मृत्तिका शिल्प और ग्राफिक डिज़ायनिंग का अध्ययन किया। इसके पश्चात सन 1944 में वे bombay चले गए जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध सर जे जे स्कूल आफ आर्ट में दाखिला लिया पर बीमारी के कारण सन 1947 में उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। सन 1952 में उन्हें एक छात्रवृत्ति मिली जिसके बाद उन्होंने mexico के पलासियो नेशनेल डि बेलास आर्ट में अध्ययन किया। यहाँ पर उन्हें डिएगो रिवेरा और डेविड सेक़ुएइरोस जैसे प्रसिद्ध कलाकारों famous artists of world के अंतर्गत कार्य करने और सीखने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने यू.के. के इंपीरियल सर्विस कालेज विंडसर में भी कला का अध्ययन किया।

करियर

भारत के विभाजन का असर युवा Satish Gujral के मन पर बहुत पड़ा और शरणार्थियों के मन की व्यथा उनके कला में व्यक्त होती है। सन 1952 से लेकर सन 1974 तक गुजराल ने अपने अपनी मूर्तियों, चित्रों और दूसरी कलाओं को दुनियाभर के शहरों जैसे न्यू यॉर्क, नयी दिल्ली, मोंट्रियल, बर्लिन और टोक्यो आदि में प्रदर्शित किया।

Satish Gujral एक वास्तुकार भी रह चुके हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित बेल्जियम के दूतावास का भी डिजाईन बनाया जिसे ‘इंटरनेशनल फोरम ऑफ़ आर्किटेक्ट्स’ ने ’20वीं शदी की दुनिया की सबसे बेहतरीन इमारतों’ में शामिल किया।

उन्होंने दुनियाभर के अनेक होटलों, विश्वविद्यालयों, आवासीय भवनों, उद्योग स्थलों और धार्मिक इमारतों की शानदार वास्तु परियोजनाएँ तैयार की हैं।

Satish Gujral ने अपने रचनात्मक जीवन में अमूर्त चित्रण किये हैं और चटकीले रंगों के सुंदर संयोजन बनाए हैं। उन्होंने अपनी कला में जीव-जंतुओं और पक्षियों को भी सहज स्थान दिया है।Satish Gujral ने अपने कृतियों के लिए प्रेरणा इतिहास, लोक कथाओं, पुराणों, प्राचीन भारतीय संस्कृति और विविध धर्मों के प्रसंगों से लिया और अपने चित्रों में सँजोया।

उनकी कृतियाँ हिरशर्न कलेक्शेन वाशिंगटन डी सी, हार्टफोर्ड म्यूज़ियम तथा द म्यूज़ियम आफ मार्डन आर्ट न्यू यॉर्क जैसे अनेक प्रसिद्ध संग्रहालयों में प्रदर्शित की जा चुकी हैं।

व्यक्तिगत जीवन

Satish Gujral का विवाह किरण गुजराल के साथ हुआ और दोनों भारत की राजधानी दिल्ली में रहते हैं। उनके पुत्र मोहित गुजराल एक प्रसिद्ध वास्तुकार हैं और भूतपूर्व मॉडल फिरोज गुजराल से विवाहित हैं। उनकी बड़ी बेटी अल्पना ज्वेलरी डिज़ाइनर और दूसरी बेटी रसील एक इंटीरियर डिज़ाइनर हैं। उनके बड़े भाई इन्दर कुमार गुजराल भारत के पूर्व प्रधानमंत्री थे।

Satish Gujral के जीवन और काम पर कई वृत्तचित्र बन चुके हैं और एक फिल्म भी बन रही है। फरवरी 2012 में ‘अ ब्रश  विथ  लाइफ’ नाम का 24 मिनट का एक वृत्तचित्र जारी किया गया। यह वृत्तचित्र उनकी इसी नाम की एक पुस्तक पर आधारित है।

Satish Gujral ने अपनी आत्मकथा भी लिखी है। इसके अतिरिक्त Satish Gujral  के कार्यों और जीवन पर तीन और पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

सम्मान और पुरस्कार

विभिन कलाओं में अपनी नैसर्गिकता के लिए Satish Gujral  कई राष्ट्रिय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

सन 1999 में भारत सरकार ने इन्हें Padam Bhusan से सम्मानित कियामेक्सिको का ‘लियो नार्डो द विंसी’ पुरस्कार भी इन्हें मिल चुका हैसतीश गुजराल को बेल्जियम के King का ‘आर्डर ऑफ़ क्राउन’ सम्मान भी प्राप्त हैसन 1989 में इन्हें ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्चर’ तथा ‘दिल्ली कला परिषद’ द्वारा सम्मानित किया गया।

New Delhi स्थित बेल्जियम दूतावास के भवन की परियोजना के लिये वास्तुरचना के क्षेत्र में उन्हें अंतर्राट्रीय ख्याति मिली है। इस इमारत को ‘इंटरनेशनल फोरम आफ आर्किटेक्ट्स’ द्वारा बीसवीं सदी की 1000 सर्वश्रेष्ठ इमारतों की सूची में स्थान दिया गया है।सन 2014 में उन्हें ‘एन.डी.टी.वी. इंडियन ऑफ़ द इयर(N.D.T.V. Indian Of The Year)’ का सम्मान भी दिया गया,वे तीन बार कला का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं – दो बार चित्रकला और एक बार मूर्तिकला के लियेदिल्ली व punjab की राज्य सरकारों ने भी उन्हें उनके कार्यों और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया है।

 

 

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