सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी की जीवनी –Sulajja Firodia Motwani Biography in Hindi

उद्योगपति सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी की जीवनी –Sulajja Firodia Motwani Biography

 

जन्म: 26 अगस्त 1970, पुणे, भारत

व्यवसाय/पद: संयुक्त प्रबंध निदेशक, काइनेटिक इंजीनियरिंग लिमिटेड

सुलज्जा - Sulajja Firodia Motwani Biography in Hindi - सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी की जीवनी –Sulajja Firodia Motwani Biography in Hindi
सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी की जीवनी –Sulajja Firodia Motwani Biography in Hindi

सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी एक भारतीय महिला उद्यमी हैं। वे काइनेटिक मोटर कंपनी लिमिटेड और काइनेटिक इंजीनियरिंग लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक हैं। अपने कठिन परिश्रम और प्रबंधन से सुलज्जा ने साबित किया है कि मौका मिलने पर बेटी न सिर्फ पिता की वास्तविक वारिस बन सकती है, बल्कि अपने परिवार को बुरे समय से भी बचा सकती है। कुछ बड़ा करने के जज्बे ने सुलज्जा को मुश्किल दौर में अपनी कंपनी को पुनर्जीवित करने की चुनौती पार करने का हौसला दिया। आज वो भारत के कुछ गिने-चुने शीर्ष महिला उद्योगपतियों में से एक हैं। देश-विदेश के कई संस्थानों और संगठनों ने उनके उपलब्धियों के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है।

सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी की जीवनी –Sulajja Firodia Motwani Biography in Hindi

प्रारंभिक जीवन

सुलज्जा का जन्म 26 अगस्त 1970 को भारत के पुणे शहर में हुआ था। उनकी शुरुआती पढाई पुणे में ही हुई और आगे चलकर उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से 1990 में वाणिज्य विषय के साथ स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह अमेरिका चली गयीं और पिट्सबर्ग में प्रतिष्ठित कारनेगी मेलॉन विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री  प्राप्त किया। कैलिफोर्निया की एक कंपनी में कार्य अनुभव प्राप्त कर सुलज्जा वर्ष 1996 में भारत वापस लौटीं।

कैरियर

सुलज्जा चाहती थीं कि पहले काइनेटिक ग्रुप की कार्य संस्कृति जानें, मानव संसाधन समझें, और इसके बाद समूह के प्रमुख कारोबार से जुड़ें| इसी दिशा में उन्होंने काइनेटिक ग्रुप की एक वेल्डिंग मशीन निर्माता कंपनी जयहिंद इंडस्ट्रीज से अपने कैरियर की शुरुआत की। यह वक्त कंपनी के लिए कठिन था क्योंकि होंडा मोटर कंपनी काइनेटिक के साथ अपनी भागेदारी समाप्त करना चाह रहा था। इसका कारण था बाजार में बाइक्स की बढ़ती लोकप्रियता और सड़कों पर से मोपेड्स व स्कूटरों का समाप्त होता हुआ एकाधिकार।

एक तरफ उनके पिता अरुण फिरोदिया होन्डा के साथ अनुबंध करने में सफल रहे वहीँ दूसरी ओर सुलज्जा के सामने मार्केटिंग यानि विपणन की चुनौती थी। इस दिशा में कार्य करते हुए उन्होंने अपने डीलर्स के माध्यम से बाजार का मूड जाना और इस नतीजे पर पहुंची कि मोपेड व स्कूटर निर्माता अन्य कंपनियों की तरह काइनेटिक को भी बाइक मार्केट में एंट्री लेनी पड़ेगी। इसके बाद कंपनी के मार्केटिंग नेटवर्क को मजबूत करने के लिए उन्होंने लगभग 200 नए डीलर जोड़े। धीरे-धीरे युवाओं को नियुक्त कर काइनेटिक ग्रुप को पुनर्जीवित किया।

दोपहिया बाजार में स्पर्धा बढ़ती जा रही थी और काइनेटिक की होंडा जापान के साथ भागीदारी भी समाप्त हो गयी। इसके पश्चात काइनेटिक ने दोपहिया वाहनों के हर सेग्मेंट (मोपेड, स्कूटर व बाइक) में हर क्षमता, डिज़ाइन व मूल्य के वाहन बाज़ार में पेश किया पर बढ़ती स्पर्धा के कारण काइनेटिक ग्रुप  कुछ ख़ास नहीं कर पाया और अंततः उन्हें अपना दोपहिया वाहन व्यवसाय, प्लांट, ब्रांड, मार्केटिंग नेटवर्क समेत महिन्द्रा एंड महिन्द्रा को 182 करोड़ रुपए में बेचना पड़ा। सुलज्जा के अनुसार ‘अपने दादाजी व पिताजी द्वारा स्थापित कंपनी किसी और को सौंप देना आसान नहीं था, पर कर्ज का बढ़ता बोझ और लगातार घाटा कंपनी की नेटवर्थ बर्बाद कर रहा था इस लिए यह निर्णय लेना पड़ा।’

इस फैसले के बाद सुलज्जा ने काइनेटिक को पूरी तरह ऑटोमोटिव कम्पोनेंट्स कंपनी बनाने पर जोर दिया और नयी उंचाईयों तक ले गयीं। काइनेटिक द्वारा बनाए गए इंजन नीदरलैंड की टोमोज, इटली की अगस्ता के अलावा भारत में फोर्ड, टाटा मोटर्स, करारो, विस्टोन जैसी कंपनियां खरीद रही हैं। काइनेटिक ने गियर बॉक्स, वेरिएटर, ड्राइव, फोर्क, एक्सेल, शॉक स्टिएरिंग आर्म्स, क्रेक शाफ्ट्स, सिलेंडर हेड्स व आईसी इंजन बनाने आदि में भी दक्षता हासिल कर ली है। इन कार्यों के अलावा काइनेटिक अब कई कंपनियों के लिए संपूर्ण वाहन भी असेम्बल (तैयार) करती है।

सुलज्जा ने ग्रुप के व्यवसाय को डाइवर्सिफाई भी किया है। हाल ही में उन्होंने बेल्जियम के इकारोस सोलर ग्रुप के साथ मिलकर इकारोस काइनेटिक सोलर नामक कंपनी की स्थापना की है। यह कंपनी जरुरत-अनुसार (कस्टमाइज्ड) लो-कैपेसिटी एनर्जी सॉल्यूशंस उपलब्ध करवाएगी।

व्यक्तिगत जीवन

मनीष मोटवानी उनके पति हैं और इनका एक पुत्र भी है। सुलज्जा अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत जागरूक रहती हैं और विभिन्न खेलों में दिलचस्पी रखती हैं। उन्होने राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और स्कीइंग और स्कूबा डाइविंग जैसे खेलों में भी ख़ास दिलचस्पी रखती हैं।

सुलज्जा सम्मान और पुरस्कार

सुलज्जा को उनकी व्यायसायिक गतिविधियों और उद्योग जगत में उनके योगदान को देखते हुए कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।

इंडिया टुडे पत्रिका ने उन्हे भारत की शीर्ष पच्चीस उद्यमियों में शामिल करते हुये उन्हें “फेस ऑफ मिलेनियम” से अलंकृत किया।उन्हें वर्ष 2002-2003 में विपणन और प्रबंधन संस्थान वेस्टोवेड के द्वारा महिला सीईओ के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु ‘यंग एचीवर्स अवार्ड फॉर बिजनेस’ से सम्मानित किया गया।2002-2003 में उन्हें ‘बिजनेस टुडे’ से युवा सुपर अचीवर अवार्ड भी प्राप्त हुआ।यंग सोसायटी द्वारा अचीवर्स अवॉर्ड फॉर बिजनेस मिला।वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा ‘ग्लोबल लीडर ऑफ टुमॉरो’ अवॉर्ड।

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